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INDEX (3) 001. प्रस्तावना (1) 0037. दोहरी लाइन पर इकहरी लाइन का संचालन (1) 007. गाड़ी सिग्नल रजिस्टर (1) 009. स्टेशन संचालन नियम (1) 01.परिचालन नियंत्रण का संगठन एवं कार्य (1) 02.01 ट्रेन कंट्रोल एव गाड़िया संचालन में कंट्रोल के जिम्मदारी (1) 02.02 ट्रैफिक कंट्रोल (1) 02.03.पॉवर कंट्रोल (1) 02.04 वैगनो की उपयोगीता & इंजन उपयोग (ENGINE UTILIZATION) (1) 03 - मास्टर चार्ट (MASTER CHART) (1) 04 - सुबह की पोजीशन (MORNING POSITION) (1) 05 - बगाडी संचालन पर प्रभाव डालने वाले कारक (FATO) (1) 06 - 01.उपनगरीय नियंत्रण (SUBURBAN CONTROL) (1) 06 - 02.एरिया कंट्रोल (1) 06 - 04.सेंट्रल कंट्रोल (1) 06- 03.ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम (TRAIN MANAGEMENT SYSTEM) (1) 07 - नियंत्रण कार्यालय में विभाग नियंत्रकों के कर्त्तव्य (DUTIES) (1) 08 - विभिन्न परिस्थियों में खण्ड नियंत्रक (SCOR) द्वारा किये जाने वाले कार्य (1) 09 - सवारी गाडी के कोड (IRCA Rule Book - IV) (1) 10 - संखियकी (STATISTICS) (1) 10 -01. परिचालन अनुपात (OPERATION RATIO) (1) 12 - 01.विशेष प्रकार के माल स्टॉक की मार्शलिंग (1) 12 - 02.माल गाडी का ब्लाक रेक / Standard rake size for Train load (1) 12 - 03.ओ डि सि (ODC) संचालन (1) 12 - यात्री और माल गाडी का ब्लाक रेक (1) 13 - 01.डीविज़न वैगन बैलेंस / (DIVISONAL WAGON BALANCE) (1) 13 - इंटरचेंज (Interchange) (1) 14 - 01.थ्रू -पुट / THROUGH PUT (1) 15 - 01.मालगाड़ी को आदेशित करना (ट्रेन ओर्ड़ेरिंग / TRAIN ORDERING ) (1) 15 - 02.माल गाडी की औसात गति (1) 15 - 03.वैगनो का यानात्रण (Transhipment of Goods) (1) 15 - 04.वेगन पूल (1) 15 - 07.गाड़ीयो का प्रस्थान पूर्व विलंब (PDD) (1) 15 - मालगाड़ी संचालन (Goods Train Operation) एवं लोड टेबल (1) 15 -06.कन्टेनराईजेशन Container (CONCOR) (1) 16 - 01.समय पालन (PUNCTUALITY) (1) 16 - 02.समय सारणी (TIME TABLE) (1) 16 - 03.रेक लिंक / (RAKE LINK) (1) 16 - 04.प्लेटफार्म ऑक्यूपेशन चार्ट / (Platform Occupation Chart) (1) 16 - 05.पिट लाइन ऑक्यूपेशन चार्ट (Pit Line Occupation Chart) (1) 16 - 06.विषेश/वी आई पी गाड़ीयो का संचालन (Movement of Special/VIP Trains) (1) 16 - 07.मेला एवं मिलिटरी स्पेशल गाड़ियों का संचालन एवं सावधानियाँ (1) 16 - यात्री गाडी संचालन / Passenger Train Operation (1) 17 - स्टॉक रिपोर्ट / Stock Report (1) 18 - 01.क्रू लिंक (CREW LINK) / लोको लिंक (LOCO LINK) (1) 18 - 02.दस घंटे नियम (10 HOURS RULE) (1) 18 - लॉबी कार्य पध्दति / LOBBY WORKING (1) 19 - 01.इंजन योजना (POWER PLAN) (1) 19 - 02.इंजन की उपयोगीता (ENGINE UTILISATION) (1) 19 - 03.विशिष्ठ उर्जा खपत / SPECIFIC FUEL CONSUMPTION (SPC) (1) 19 - विभिन प्रकार के इंजन और उनक हार्स पॉवर तथा गती (1) 20 - 01. रेशनलाइजेशन स्कीम : / Rationalization Scheme (1) 20 - 02.रोक (BAN) & प्रतिबंध (RESTRICTION) (1) 20 - 03.वैगन पंजीकरण (1) 20 - 04.वैगन उपयोगीता चक्र (WTR) (1) 20 - 05.वेगन सेन्सस / WAGON CENSUS (1) 20 - वैगन उपयोगीता / अधिमान्य यातायात आदेश :(PTO/PTS) (1) 20.06.माल परिचालन सूचना प्रणाली (FOIS) एवं अन्य परिचालन सूचना प्रणाली (ICMS CMS COA ETC NTES) (1) 21 - 01.विधुतिकृत सेक्शन में गाड़िया का संचालन (1) 21 - 02.ट्रैफिक वोर्किंग रूल्स (TWR) (1) 21 - 03.टावर वैगन का संचालन (1) 21 - 04.रेल मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजानिक क्षेत्र के उपक्रम और अन्य संगठन (PSUs) (1) 21 - समपार (लेवल क्रासिंग ) (1) 22 - 01.सिगनल को खतरे की स्तिथि में पर करना (SPAD) (1) 22 - 02.गंभीर दुर्घटना SERIOUS ACCIDENT (ऍम 105) (1) 22 - 03.दुर्घटना होने पर खंण्ड नियंत्रक के कर्त्तव्य (AM - ३१९) (1) 22 - 04.दुर्घटना स्थल के प्रभारी अधिकारी के कर्तव्य (AM - 324) (1) 22 - 05.मंडल नियंत्रण कार्यालय के प्रभारी अधिकारी के कर्तव्य - (AM - 323) (1) 22 - 06.दुर्घटना होने पर स्टेशन मास्टर की ड्यूटी (ऍम 311) (1) 22 - 07.रहत व्यवस्थाओ की ओर्ड़ेरिंग देना (AM - 405) (1) 22 - 08.अपघात प्रबंध (DISASTER MANAGEMENT) (1) 22 - 09.गोल्डन ऑवर(GOLDEN HOUR) (1) 22 - 11.नॉन - इंटरलॉकिंग संचालन (Non - Interlocked Working) (1) 22 - दुर्घटना (Accident) (ऍम 104) (1) 23 - कंट्रोल ओफ्फिक निर्देश (1) 24 - COA Main Menu (1) 25 - अग्रीम प्लाटिंग (चार्टिंग) / Advance Plotting (1) 26 - 01.नियंत्रण कार्यालय अनुप्रयोग हेतु त्वरित दिशा निर्दश (1)

पाइथाॅन रैक का संचालन

 पाइथाॅन रैक का संचालन

रेलवे मे  दिन-प्रतिदिन बढ़ते हुए यातायात को देखते हुए भारतीय रेलवे अपनी संचालन लागत कम करने के दृष्टिकोण से थ्रू-पुट को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इस हेतु कई उपाय किए जा रहे हैं जैसे - 

वैगनो  की डिजाइन मे  परिवर्तन करके भार क्षमता को बढ़ाना, प्रत्येक गाड़ी मे  वैगनों की संख्या मे  बढ़ोत्तरी करके तथा एक्सल भार बढ़ाकर। इस संदर्भ मे  ‘डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर’ बनाने की भी योजना है। परन्तु जब तक ये किया जाए तब तक रेलवे ने कुछ सेक्शनो  पर इस हेतु ‘लाँग हाॅल गाड़ी’ चलाने का निर्णय लिया है। ‘‘एक से अधिक खाली या भरे मानक गाड़ियों के रैक को जोड़कर चलाने को ‘लाँग हाॅल गाड़ी’ के नाम से जाना जाता है, जिसे ‘‘पायथाॅन रैक’’ कहते हैं। इस शब्द को गाड़ी के नाम के आगे जोड़ा जाता है और फाॅइस व कन्ट्रोल
चार्ट में स्पष्ट दर्शाया जाता है। ऐसी गाड़ियों को चलाने से थ्रू-पुट मे  वृद्धि होती है, व्यस्त मार्गो  पर गाड़ियाँ के दबाव को कम करने में आसानी रहती है एव  गाड़ियो  की संख्या में कमी करने के कारण रोलिंग स्टाॅक की औसत गति बढ़ाने में मदद मिलती है। वर्तमान मे  ट्रायल आधार पश्चिम रेलवे सहित कई रेलवे पर ऐसी गाड़ियाँ रेलवे बोर्ड द्वारा जारी पाॅलिसी/निर्देश के अनुसार चलाई जा रही हैं। लाग हाॅल गाड़ी चलाने की पाॅलिसी/गाइडलाइन एवं नियम - 

  • संबंधित रेलवे अपनी क्षेत्रीय रेलवे मे  ऐसी गाड़ी चलाने हेतु सेक्शन की पहचान करेगी व ‘पायथाॅन’ रैक बनाने हेतु पाॅइन्ट नामित करेगी। 
  • ‘पायथाॅन’ रैक गाड़ी परीक्षक की उपस्थिति मे  बनाया जाएगा। जिन पाॅइन्ट पर गाड़ी परीक्षक न हो वहाँ उसकी व्यवस्था की जाएगी। 
  • गाड़ी के लिए ‘कम्बाइन्ड ब्रेक पावर’ प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। 
  • ऐसा रैक सिंगल पाइप एयर ब्रेक सिस्टम का होगा। 
  • जोड़े गए प्रत्येक गाड़ी के रैक के लिए अलग से वैध ब्रेक पावर प्रमाणपत्र अलग-अलग होने चाहिए। 
  • जोड़े जाने वाले रैको  में से जिस रैक की सेक्शन मे  गति सबसे कम हो, वही गति ‘पायथाॅन’ रैक की होगी। 
  • 9000 टन से अधिक भार एव  60 कि.मी.प्र.घ. से अधिक गति वाली लाँग हाॅल गाड़ियों को आर.डी.एस.ओ. द्वारा ट्रायल करने के बाद ही चलाने की अनुमति दी जाएगी। 
  • परिचालनिक आवश्यकतानुसार ऐसे रैक को अधिसूचित स्टेशन पर ही अलग किया जाएगा फिर भी किसी सवारी गाड़ी को प्राथमिकता देने या क्राॅसिंग करने या किसी अन्य आवश्यक परिस्थिति मे  गाड़ी को पर्याप्त सावधानी रखते हुए अन्य किसी स्टेशन पर भी अलग किया जा सकता है। 
  • लाँग हाॅल गाड़ी के रैक का कम्पोजीशन - अगला भाग खाली गाड़ी  पिछला भाग खाली गाड़ी या अगला भाग भरी गाड़ी $ पिछला भाग खाली गाड़ी या अगला भाग भरी गाड़ी  पिछला भाग भरी गाड़ी होगा। 


गाड़ी परीक्षक की आवश्यकता - 
  • गाड़ी परीक्षक ब्रेक कन्टीन्यूटी की जाँच करने के बाद आगे के लोको व अन्तिम वाहन के ब्रेक पावर प्रमाणपत्र विवरण को दर्शाते हुए ‘कवर ब्रेक पावर प्रमाणपत्र’ जारी करने की व्यवस्था करेगा। 
  • कवर ब्रेक पावर प्रमाणपत्र में अलग अलग रैक के मूल ब्रेक पावर को भी दर्शाया जाएगा। 
  • आगे के लोको में 5 कि.ग्रा./से.मी. 2 तथा पिछले ब्रेकवान मे  कम से कम 4.7 कि.ग्रा./ से.मी. 2 होगा। 
  • लाँग हाॅल गाड़ी के लिए पहचान किए गए सेक्शनों में अतिरिक्त विशेष टर्मीनशन इंजीनियरिंग इंडीकेटर लगाए जाएंगे। 
  • यात्रा के दौरान लोको पायलट व गार्ड के बीच संचार के लिए तथा रैक के फाॅरमेशन के लिए गाड़ी परीक्षक को पहले से परीक्षण किए गए पर्याप्त क्षमता वाले वाॅकी-टाॅकी सेट उपलब्ध कराए जाएंगे। 
  • लोको पायलट व गार्ड के बीच संचार हेतु सा. एवं स.नि. 4.50 के अनुसार सीटी कोड का उपयोग भी किया जाएगा। 
  • यात्रा के दौरान यदि वाॅकी-टाॅकी संचार साधन खराब हो जाता है तो अगले स्टेशन पर लाँग हाॅल संचलन को समाप्त कर दिया जाएगा। इसी प्रकार संचार खराबी के दौरान लाँग हाॅल गाड़ी का संचालन नहीं किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अगले लोकोमोटिव मे  रीहास्टट ब्रेक/डायनामिक ब्रेक कार्यशील स्थिति मे  है। 


लोकोमोटिव का कार्य -




  • बीच की यूनिट से मैनुअली सी-2 (ब्रेक प्रेशर चार्जिंग वाल्व) रिले वाल्व को काटकर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। 
  • जब दोनों रैक को अलग किया जाए तो सी-2 रिले वाल्व की सैटिंग को पुनः सही कर देना चाहिए ताकि पीछे की गाड़ी सामान्य तरीके से चार्ज हो जाए। रु खींचे जा रहे लोड के आधार पर चुना जा सकता है। 
इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के साथ कार्यप्रणाली - 
  • जब अगला भाग भरा हुआ व पिछला भाग खाली के कोम्बीनेशन के साथ गाड़ी खींची जाए तो कम से कम अगली मल्टीपल यूनिट के पाँच कम्प्रेशर चालू स्थिति में होने चाहिए। 
  • बीच के लोकोमोटिव द्वारा एयर प्रेशर चार्ज करने की अनुमति नहीं है। 
  • गाड़ी को अगला लोकोमोटिव चलाएगा एव  बीच वाला लोको आवश्यकतानुसार अतिरिक्त शक्ति प्रदान कर सकता है। 

गाड़ी रवाना करते समय सावधानी - 
  • यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि अगले लोकोमोटिव में  5 कि.ग्रा./से.मी. 2 तथा अन्तिम ब्रेकवान मे  कम से कम 4.7 कि.ग्रा./से.मी. 2 ब्रेक पावर प्रेशर है। 
  • गाड़ी रवाना करने से पूर्व अन्तिम ब्रेकवान मे  आवश्यक प्रेशर आ चुका है इसे अगले लोको पायलट को वाॅकी-टाॅकी द्वारा बताने की जिम्मेदारी पिछले ब्रेकवान के गार्ड की है। 
  • अगले रैक का गार्ड अपनी गाड़ी के ब्रेकवान या बीच के लोकोमोटिव मे  यात्रा करेगा एवं पिछले रैक का गार्ड अन्तिम ब्रेकवान मे रहेगा तथा पूरी गाड़ी की संचालन व संरक्षा की जिम्मेदारी उसकी रहेगी। 
  •  लाँग हाॅल गाड़ियों के संचालन हेतु परिचालन एव  ट्रैक्शन के पर्यवेक्षक/अधिकारियों की टीम द्वारा ऐसी गाड़ी चलाने के संबंध मे  जानकारी एव  एक दिन का प्रशिक्षण गाड़ी कर्मीदल एवं गार्ड को दिया जाएगा। 
  •  जिस सेक्शन मे  ऐसी गाड़ियो  का संचालन होगा, उस सेक्शन के स्टेशन कर्मचारियों को भी इस संबंध में प्रशिक्षित किया जाएगा।

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